SRIJANKIAANCH
Tuesday, 7 July 2026
कल्याण
Saturday, 4 July 2026
प्रार्थना
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ।।1।।
भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धा: स्वान्तः स्थमीश्वरम्।।2।।
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शङ्कररूपिणम्।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते।।3।।
सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ।
वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कबीश्वरकपीश्वरौ।।4।।
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्।।5।।
यन्मायावशवर्तिं विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा
यत्सत्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः।
यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां
वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्।।6।।
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा-
भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति।।7
हनुमानाष्टक
श्रीनवग्रहस्तोत्रम्
Tuesday, 30 June 2026
ज्ञान गंज
Friday, 26 June 2026
ज्ञानगंज की “अदृश्य डाक”
ज्ञानगंज की “अदृश्य डाक”
स्वामी विशुद्धानंद परमहंस सूर्य सिद्धांत: (i) लाहिड़ी महाशय के परम शिष्य । (ii) “गंध बाबा” के नाम से प्रसिद्ध । (iii) ज्ञानगंज में “सूर्य विज्ञान” की शिक्षा प्राप्त ।
सूत्र रूप में-
१. सूर्य विज्ञान (Solar Science): (i) सूर्य की किरणों को लेंस द्वारा हथेली पर केंद्रित करना । (ii) योग शक्ति एवं मंत्रों द्वारा ऊर्जा का संयोजन । (iii) परमाणुओं का पुनर्गठन (Rearrangement) । (iv) शून्य से फूल, अंगूर, वस्त्र आदि प्रकट करना । मूल सिद्धांत: (i) “हर पदार्थ सूर्य रश्मियों के संयोजन से बना है।” (ii) ऊर्जा को पदार्थ में बदलना संभव ।
२. ज्ञानगंज की शक्तियों की भूमिका: आकाशीय मार्ग (Astral Channel)- (i) सूक्ष्म जगत से भौतिक जगत में वस्तुओं का स्थानांतरण । योगिनियाँ एवं सिद्ध: (i) ‘खेचरी विद्या’ में पारंगत । (ii) वस्तुओं के “टेलीपोर्ट” की क्षमता । (iii) साधक के संकल्प को कार्यरूप देना । मानसिक आदेश: (i) विशुद्धानंद जी के संकल्प पर वस्तुएँ प्रकट होना ।
३. प्रसिद्ध गुलाब घटना: (i) एक अंग्रेज ने परीक्षा ली । (ii) मौसम से बाहर का फूल माँगा । (iii) सूर्य किरणों के प्रयोग से ताजा गुलाब प्रकट । (iv) संकेत: फूल ज्ञानगंज के उद्यानों से आया ।
४. योग और विज्ञान का मेल: (i) इसे “चमत्कार” नहीं, “उच्च विज्ञान” कहा गया । (ii) आधुनिक 3D प्रिंटिंग जैसी अवधारणा से तुलना । (iii) ऊर्जा → पदार्थ परिवर्तन की प्रक्रिया । (iv) योगिनियाँ = ऊर्जा वाहक (Catalyst) ।
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ज्ञानगंज में प्रवेश के नियम
आध्यात्मिक पात्रता- (i) कुण्डलिनी जागरण आवश्यक । (ii) स्थूल से सूक्ष्म चेतना में प्रवेश । गुरु की अनुमति: (i) केवल गुरु/सिद्ध के आमंत्रण से प्रवेश । (ii) सामान्य व्यक्ति पहुँच नहीं सकता । शरीर शुद्धि: (i) कायाकल्प एवं योगिक शुद्धिकरण आवश्यक। (ii) उच्च कंपन (High Vibration) सहने की क्षमता चाहिए ।
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ज्ञानगंज की अवधारणा: (i) सामान्य भौगोलिक स्थान नहीं । (ii) एक “आध्यात्मिक आयाम” (Spiritual Dimension) । (iii) सिद्ध योगियों एवं योगिनियों का गुप्त केंद्र ।
प्रमुख कथन
(i) “जब मनुष्य स्वयं को ब्रह्मांड के साथ एक कर लेता है, तो हर मन एक ट्रांसमिटिंग स्टेशन बन जाता है।”- महावतार बाबाजी
(ii) “प्रकृति के गुप्त नियमों को जानने वाला व्यक्ति असंभव को भी संभव कर सकता है।” — विशुद्धानंद परमहंश
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योगियों की आयु और दीर्घायु का रहस्य (स्मरणीय बिंदु)
(i) ज्ञानगंज के योगियों की विशेषता: (i) ज्ञानगंज के योगियों के बारे में माना जाता है कि वे सैकड़ों से लेकर हज़ारों वर्षों तक जीवित रहते हैं। (ii) उनकी दीर्घायु का आधार साधारण शरीर विज्ञान नहीं, बल्कि उच्च योग-साधना मानी जाती है।
(ii) दीर्घायु के दो मुख्य रहस्य: 1. कायाकल्प विद्या: (i) योगी सूर्य विज्ञान और विशेष दिव्य जड़ी-बूटियों का उपयोग करते हैं। (ii) इन जड़ी-बूटियों को “अमृत तुल्य” माना जाता है। (iii) मान्यता है कि इससे शरीर की कोशिकाएँ (Cells) नष्ट नहीं होतीं। (iv) शरीर लंबे समय तक युवा और समर्थ बना रहता है।
2. श्वसन नियंत्रण (Breath Control): (i) क्रियायोग द्वारा वे अपनी श्वास को अत्यंत धीमा या स्थिर कर लेते हैं। (ii) सांसों की गति कम होने से शरीर की ऊर्जा क्षय भी कम होती है। (iii) माना जाता है कि समय का प्रभाव उन पर बहुत कम पड़ता है। (iv) उनके लिए समय सामान्य मनुष्यों की तरह “रैखिक” (Linear) नहीं माना जाता।
३. वर्तमान आचार्य और उनकी आयु: (१) महावतार बाबाजी: (i) ज्ञानगंज के सर्वोच्च मार्गदर्शक माने जाते हैं। (ii) क्रियायोग के मूल गुरु के रूप में प्रसिद्ध। (iii) परंपरा के अनुसार वे हजारों वर्षों से सशरीर विद्यमान माने जाते हैं। (iv) अनुमानित आयु: ५०००+ वर्ष (मान्यता अनुसार)। (२) स्वामी महातपस महाराज: (i) स्वामी विशुद्धानन्द के दीक्षा गुरु बताए जाते हैं। (ii) सूर्य विज्ञान के महान आचार्य माने जाते हैं। (iii) ज्ञानगंज के प्रमुख सिद्धों में गिने जाते हैं। (iv) अनुमानित आयु: हज़ारों वर्ष। (३) भृगुराम परमहंस: (i) ज्ञानगंज की गुप्त परिषद के प्रभावशाली सिद्ध बताए जाते हैं। (ii) उच्च योग और रहस्य विज्ञान के ज्ञाता माने जाते हैं। (iii) अनुमानित आयु: हज़ारों वर्ष।
४. वर्तमान संचालन: (i) मान्यता अनुसार ज्ञानगंज का संचालन आज भी महान सिद्धों के निर्देशन में होता है। (ii) मुख्य रूप से महातपस महाराज और भृगुराम जी का नाम लिया जाता है। (iii) इन्हें “कालजयी” (Beyond Time) माना जाता है। (iv) इसलिए उनके लिए सामान्य मनुष्यों जैसी “आयु” या “रिटायरमेंट” की अवधारणा लागू नहीं मानी जाती।
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ज्ञानगंज की आंतरिक व्यवस्था
१. ज्ञानगंज की आंतरिक व्यवस्था: (i) योगी केवल ध्यान नहीं करते, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन बनाए रखते हैं। (ii) ज्ञानगंज में “योगिनी चक्र” अत्यंत सक्रिय माना जाता है। (iii) योगिनियाँ प्रकृति की शक्तियों का संचालन और साधकों की रक्षा करती हैं। (iv) मान्यता अनुसार महान वैज्ञानिक आविष्कार “विचार-बीज” के रूप में प्रेरित किए जाते हैं। (v) वहाँ विज्ञान और अध्यात्म का भेद समाप्त होकर केवल “सत्य” शेष रहता है ।
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कायाकल्प विज्ञान
कायाकल्प विज्ञान
१. कायाकल्प का अर्थ: (i) “काया” = शरीर । (ii) “कल्प” = परिवर्तन / नवीनीकरण । (iii) उद्देश्य: पुराने कोशों को हटाकर नए तेजस्वी कोशों का निर्माण। २. कायाकल्प की मुख्य विधियाँ: (क) कुटीप्रावेशिक विधि : (i) साधक ४०–९० दिन बंद कुटिया में रहता है। (ii) सूर्य प्रकाश और बाहरी वायु सीमित रहती है। (iii) विशेष जड़ी-बूटियों और औषधियों का सेवन कराया जाता है। (iv) परिणाम: *पुराने बाल झड़ना ,**दाँत पुनः उगना ,***त्वचा का नवयौवन जैसा होना । (ख) यौगिक एवं सौर विधि: (i) सूर्य विज्ञान और प्राण विद्या का प्रयोग। (ii) विशेष सूर्य रश्मियों को चक्रों पर केंद्रित किया जाता है। (iii) शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा परिवर्तन उत्पन्न होते हैं। (iv) परंपरा अनुसार महावतार बाबाजी ने विशेष “अमृत” का प्रयोग कराया था।
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कायाकल्प के प्रमुख चरण
*शुद्धिकरण: शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। * कायापलट: पुरानी त्वचा हटकर नई चमकदार त्वचा आती है। * इंद्रिय शक्ति: दृष्टि और श्रवण अत्यंत तीव्र हो जाते हैं। * स्थिरता: श्वास और हृदय गति पर पूर्ण नियंत्रण हो जाता है। उदहारण - * मदन मोहन मालवीय द्वारा कायाकल्प प्रयोग का उल्लेख मिलता है। * अमरकंटक के बर्फानी बाबा के बारे में भी कहा जाता है कि उन्होंने कायाकल्प किया था । *कहा जाता है कि उनके बाल काले होने और तेज बढ़ने जैसे परिवर्तन दिखाई दिए।
ज्ञानगंज के योगियों का “वज्र शरीर”: *शरीर को केवल “सेवा का वाहन” माना जाता है। *योग और औषधियों द्वारा शरीर का पुनर्नवीनीकरण किया जाता है। * उद्देश्य: दीर्घकाल तक मानवता की सेवा।
सामान्य व्यक्ति के लिए सावधानी: *बिना सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन के प्रयास जोखिमपूर्ण माने जाते हैं। *ब्रह्मचर्य और मानसिक स्थिरता आवश्यक मानी जाती है। * तीव्र औषधियाँ और ऊर्जा साधारण शरीर सहन नहीं कर पाता।
मुख्य सूत्र: * “शरीर प्रकाश के परमाणुओं का संघनन है।” * “प्रकाश नियंत्रण से आयु नियंत्रण संभव माना गया है।”
"शरीर केवल प्रकाश के परमाणुओं का संघनन है। यदि आप प्रकाश को नियंत्रित करना जानते हैं, तो आप शरीर की आयु को भी नियंत्रित कर सकते हैं।"- परमहंस योगानंद
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ज्ञानगंज का “अमृत कुंड”
अमृत कुंड का स्वरूप: *ज्ञानगंज के मध्य स्थित दिव्य जल स्रोत। * “मानस सरोवर का सूक्ष्म रूप” माना जाता है। * जल साधारण नहीं, “तरल प्रकाश” (Liquid Light) जैसा वर्णित। * इसमें से दिव्य “अष्टगंध” सुगंध निकलती रहती है। * जल का रंग आध्यात्मिक ऊर्जा के अनुसार बदलता माना जाता है।
अमृत कुंड की विशेषताएँ
(क) प्राण शक्ति का केंद्र: * इसमें प्राण शक्ति की अत्यधिक सांद्रता मानी जाती है। * इसे “अमृत” स्वरूप कहा गया है। (ख) रोग निवारण: * असाध्य रोगों में लाभकारी माना जाता है। * जल का स्पर्श रुग्ण कोशों को पुनर्जीवित करने वाला बताया गया है। * शरीर में नई ऊर्जा और चेतना का संचार माना जाता है। मानसिक शांति: * जल की बूंदें मस्तक पर लगाने से मानसिक विक्षेप शांत होने की मान्यता। * साधक गहरे ध्यान की अवस्था में प्रवेश करता है।
अमृत कुंड और चंद्र विज्ञान: *ज्ञानगंज में “चंद्र विज्ञान” की साधना का उल्लेख मिलता है। * अमृत कुंड को चंद्र रश्मियों का संचयन केंद्र माना जाता है। * पूर्णिमा की रात्रि में विशेष अनुष्ठान किए जाने की मान्यता। * योगिनियाँ कुंड के चारों ओर साधना करती हैं। * इससे जल की औषधीय और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ने का विश्वास।
अमृत कुंड का रहस्य: * यह केवल सामान्य भौतिक वस्तु नहीं माना जाता। * विशेष चेतना स्तर पर ही इसके दर्शन संभव बताए गए हैं। * साधारण व्यक्ति को वहाँ केवल हिम, पत्थर या सामान्य दृश्य दिखाई दे सकते हैं। * इसे “आवृत्ति” (Frequency) और चेतना का रहस्य कहा गया है। *गुरु कृपा को इसके अनुभव की कुंजी माना गया है।
मुख्य सूत्र: *“अमृत कुंड” = प्राण, प्रकाश और चेतना का संगम। *“दर्शन वही कर सकता है जिसकी चेतना अनुकूल हो।” *“गुरु कृपा के बिना सूक्ष्म लोक का अनुभव कठिन माना गया है।”
एक प्रसिद्ध घटना: विशुद्धानंद जी के जीवन से जुड़ी एक कथा है कि उन्होंने एक मरणासन्न व्यक्ति को ज्ञानगंज से लाए गए जल की कुछ बूंदों से पुनर्जीवित कर दिया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या यह गंगाजल है, तो उन्होंने मुस्कुराकर कहा था, "यह उस गंगा का जल है जो अभी तक पृथ्वी के धरातल पर नहीं उतरी—यह सिद्धाश्रम का मानस-अमृत है।"
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"अमृत कहीं बाहर नहीं, बल्कि आत्मा की उस अवस्था में है जहाँ मृत्यु का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। ज्ञानगंज का कुंड उसी अवस्था का भौतिक प्रतीक है।"
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'दिव्य पुस्तकालय ' या'विज्ञान भवन' या 'सिद्धाश्रम का अभिलेखागार'
अकाशिक रिकॉर्ड्स (Akashic Records) का भौतिक रूप: इसे ब्रह्मांड का 'अक्षय भंडार' माना जाता है। योगियों का कहना है कि ब्रह्मांड में जो कुछ भी घटा है, घट रहा है या घटने वाला है, वह सब 'आकाश' (Ether) में तरंगों के रूप में दर्ज होता है। ज्ञानगंज का यह पुस्तकालय उन सूक्ष्म तरंगों को 'पढ़ने योग्य' रूप में सुरक्षित रखता है।
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पुस्तकालय की अद्भुत विशेषताएँ: (i) जीवंत पुस्तकें: यहाँ की 'पुस्तके' कागज की नहीं बनी हैं। कहा जाता है कि वे एक विशेष प्रकार के 'प्रकाश पुंज' (Light Sheets) से निर्मित हैं। जब कोई योगी किसी विशेष कालखंड के बारे में जानना चाहता है, तो वह ज्ञान उसके सामने किसी चलचित्र (Movie) की तरह सजीव हो उठता है। (ii) लुप्त विद्याएँ: यहाँ वे सभी शास्त्र और विद्याएँ सुरक्षित हैं जो पृथ्वी पर समय के साथ लुप्त हो गईं (जैसे मूल ऋग्वेद की लुप्त शाखाएँ, अटलांटिस का विज्ञान, और प्राचीन विमान शास्त्र)। (iii) भविष्य का ज्ञान: इसमें केवल इतिहास ही नहीं, बल्कि आने वाले युगों के 'संभावित घटनाक्रम' भी सुरक्षित हैं, जिन्हें पढ़कर महावतार बाबाजी जैसे सिद्ध महापुरुष भविष्यवाणियाँ करते हैं।
भाषा का रहस्य: * पुस्तकालय में किसी भाषा का बंधन नहीं है। * यहाँ ज्ञान 'भाव-लिपि' (Thought-script) में है। * एक साधक जिस भी भाषा का ज्ञाता हो, उसे वह ज्ञान उसी भाषा में समझ आने लगता है। यह सीधे आत्मा से संवाद करने वाली तकनीक है।
पुस्तकालय के संरक्षक: पुस्तकालय की सुरक्षा का कार्य 'ज्ञान अधिकारिणी' योगिनियों और उच्च ऋषियों के अधीन है। * यहाँ प्रवेश केवल उन सिद्धों को मिलता है जो 'त्रिकालदर्शी' होने की क्षमता रखते हैं। * 'सूर्य विज्ञान' के कई जटिल सूत्र इसी दिव्य पुस्तकालय से प्राप्त हुए थे।
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ज्ञानगंज = अध्यात्म + परा-विज्ञान का दिव्य विज्ञान-केंद्र।
ग्रह-ऊर्जा शोध = मानव जीवन पर ब्रह्मांडीय प्रभावों का अध्ययन।
ज्ञान = नष्ट नहीं होता, केवल ओझल होता है; पात्रता पर गुरु उसकी कुंजी देते हैं।
ज्ञानगंज = पृथ्वी का “आध्यात्मिक उपग्रह”, जो युगों से मानवता का मार्गदर्शन करता है।
सिद्ध योगी = मानवता के लिए “अदृश्य सरकार” समान कार्यरत।
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