कल बैठक समय से एक घंटा देरी से प्रारंभ हुई।
पांच एजेंडे बताये जा रहे थे।
आय -व्यय विस्तार से आया।
कालोनी की समस्याएं भी पुरानी और उत्तर/आश्वासन भी पुराना।
सड़क योजना से परियोजना में बदल गई।
अतिक्रमण पर कोई उपलब्धि नहीं।
पांचवां एजेंडा- अध्यक्ष का चुनाव/निर्वाचन/मनोनयन/नामांकन?
प्रक्रिया क्या थी? पुरानी कमेटी अध्यक्ष द्वारा मनोनीत थी!!
तो होना क्या था जो नहीं हुआ -
चार बिंदुओं की चर्चा के बाद अध्यक्ष को घोषणा करनी थी कि इस कमेटी का कार्यकाल पूरा होने के कारण इस पत्र क्र, दिनांक के माध्यम से पंजियन फर्म सोसायटी को स्तीफा भेज गया जो पटल पर सूचनार्थ रखा जा रहा है और उसे पढ़ कर सुनाया जाना चाहिए था।
इसके पश्चात किसी भी कमेटी के वरिष्ठ या वरिष्ठतम सदस्य को निर्वाचन के लिए तय किया जाता।
चुनाव अधिकारी के रूप में वे चुनाव की घोषणा करते और या तो केवल अध्यक्ष पद के लिए या पूरे पैनल के लिए नाम आते।
इस पर जो भी नाम आते उनको पढ़ कर सुनाया जाता।।
फिर चुनाव सर्वमतेन हो इसलिए केवल एक नाम पर सहमति बनती या एक पैनल पर या पैनल पर कुछ नाम जोड़ने, घटाने को समय दिया जाता।
बाद में निर्वाचन अधिकारी द्वारा अध्यक्ष की, अथवा साथ में सभी कमेटी सदस्यों की घोषणा होती।
तालियों या ओम् की ध्वनि से सब का स्वागत होता।
कुछ फूल माला, धन्यवाद फिर भोजन।
आश्चर्य किंतु सत्य कि रजिस्टर्ड सोसायटी द्वारा पंजीकृत सोसायटी द्वारा सारे आचार संहिता का उल्लंघन किया गया।
खैर, पूरी सभा में आये किसी व्यक्ति को,सभा समाप्त होने तक कौन अध्यक्ष बना, कौन समिति सदस्य बने किसी को पता नहीं।
क्या यह लोकतांत्रिक निर्वाचन और समाज सेवा की वृत्ति है?
आखिर इसका संदेश व्यक्ति गत या कुछ लोगों को समिति में बने रहने की महत्वकांक्षा है?
…............
मुझे नहीं ज्ञात है कार्यवाही में क्या लिखा जायेगा।
पंजियन शाखा को क्या भेजा जायेगा?
आगे कौन से चेहरे सोसायटी में काम करेंगे?
.........
किंतु बड़ी बातें,बड़े लोग शायद भूल जाते हैं कि सावधानी और पूर्व योजना से किया काम सार्थकता प्रदान करता है।
आखिर कैसे सोसायटी की गंभीरता सामने आयेगी? कौन सम्मान देगा?
कल बात पार्षद, विधायक, पंजीयन कार्यालय तक जायेगी (यदि तो) कौन से आडियो -वीडियो प्रूफ हम दे पायेंगे?
मैं गत वर्ष निर्वाचन के समय नहीं था, किंतु जो सुना था और जो कल देखा -
मेरे लिए अप्रत्याशित, विस्मयकारी, अद्भुत, हास्यास्पद और अविस्मरणीय है।
सोचिए! एक समिति के निर्वाचन में इतनी अनियमितता और अगंभीरता तो राजनीतिक क्षेत्र में फिर क्या कुछ क्यों हो रहा है, समझा जा सकता है।
तो मेरा प्रश्न है कि क्या अनियमित, अवैधानिक प्रक्रिया समिति के लिए और पूर्व पदाधिकारियों के लिए सहज स्वीकार्य है?
हो सके तो चिंतन अवश्य करें।
18/5/26
सादर
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