Wednesday, 6 May 2026

पंच परिवर्तन और उच्च शिक्षा

[30/04, 21:59] Umesh Singh: एक पक्ष यह भी आया है 
आदरणीय सर 
सादर प्रणाम 
पंच परिवर्तन एक महत्वपूर्ण और मूल्यपरक अवधारणा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को केवल ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे व्यवहार, समाज और जिम्मेदारी से जोड़ना है। लेकिन मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों की वास्तविक स्थिति को देखें तो यह अभी पूरी तरह से व्यवस्थित रूप में लागू नहीं हो पाया है। यह अधिकतर कार्यक्रमों, व्याख्यानों और औपचारिक गतिविधियों तक सीमित है, न कि नियमित पाठ्यक्रम और मूल्यांकन का हिस्सा।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि पंच परिवर्तन के लिए न तो स्पष्ट सिलेबस है और न ही कोई ठोस मूल्यांकन व्यवस्था। इसी कारण छात्र और कई बार शिक्षक भी इसे गंभीरता से नहीं लेते। इसके पाँचों आयाम—पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य, समरसता, कुटुंब और स्व—अधिकतर सैद्धांतिक स्तर पर ही रह जाते हैं, जबकि व्यवहारिक गतिविधियों का अभाव बना रहता है। इस स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक है कि पंच परिवर्तन को पाठ्यक्रम, गतिविधियों और मूल्यांकन से जोड़ा जाए। जब तक यह “सिर्फ जागरूकता” से आगे बढ़कर “व्यवहारिक अभ्यास” का हिस्सा नहीं बनेगा, तब तक इसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।
मैं अपने अल्प ज्ञान से इतना ही समझ पाया हूं।
🙏🙏🙏
[30/04, 23:11] डॉ सीमा रणवीर सूर्यवंशी: आधारपाठ्यक्रम में जुड़ा है ईकाई -5 में
पर्यावरण _ द्वितीय वर्ष में आधारपाठ्यक्रम ग्रुप ब में एक स्वतंत्र विषय है।
[30/04, 23:24] Madhusudan Chaube Badwani: पर्यावरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने से पहले आधार पाठ्यक्रम के अंतर्गत सेकंड ईयर में शामिल था। 
NEP में फर्स्ट ईयर में आ गया था।
2025 - 26 के सत्र से पर्यावरण फर्स्ट ईयर से भी हटा दिया गया है।
इस समय आधार पाठ्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण किसी कक्षा में नहीं लागू है।
[01/05, 06:12] Madhusudan Chaube Badwani: द्वितीय वर्ष में उद्यमिता एवं स्टार्टअप तथा महिला सशक्तीकरण नामक दो विषय आधार पाठ्यक्रम के अंतर्गत इस वर्ष संचालित हैं।
सत्र 2025 - 26 में प्रथम वर्ष के सिलेबस तथा विषयों में बड़े परिवर्तन हुए थे। आधार पाठ्यक्रम को हटा ही दिया गया। इसी के स्थान पर मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम शामिल किया गया। 
 इसी श्रृंखला के अंतर्गत सत्र 2026-27 में सेकंड ईयर के सिलेबस में परिवर्तन होंगे।
सादर।
[01/05, 06:37] Sumangla Pateriya: आधार पाठ्यक्रम के स्थान पर अंग्रेजी में प्रथम वर्ष में Ability Enhancement Course में स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण को शामिल किया गया है जो सराहनीय है ।
[01/05, 07:31] Madhusudan Chaube Badwani: सत्र 2024-25 तक प्रथम वर्ष के आधार पाठ्यक्रम के अंतर्गत योग और ध्यान जैसा एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण और सार्थक विषय अस्तित्व में रहा. सत्र 2025-26 से उसे हटा दिया गया. इसे पुनः प्रारम्भ किया जाना चाहिए. सादर.
[01/05, 08:59] Sumangla Pateriya: पर्यावरण अध्यन का पाठ्यक्रम बनाते समय पर्यावरण एवं वानिकी विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर के सुझाव लिए जा सकते हैं ताकि पाठ्यक्रम का व्यावहारिक पक्ष सुदृढ़ हो सके 🙏
[01/05, 09:03] Sumangla Pateriya: इससे पाठ्यक्रम रोजगारोन्मुखी भी हो सकेगा 🙏
[01/05, 09:18] Sumangla Pateriya: Waste Management और Recycling के क्षेत्र में २०३० तक रोजगार के अवसरों की अपार संभावनाएं हैं । इस दिशा में विचार किया जा सकता है ।
[01/05, 10:07] अर्चना गुप्ता रीवा: Best out of waste par भी विचार कर सकते हैं क्यों कि इसमें रोज़गार के अवसर की सम्भावनाएँ हैं इसके साथ ही इससे पर्यावरण संरक्षण भी किया जा सकता है
[01/05, 10:10] डा आर पी गुप्ता: Dharmik pryavaran bhart Rojgar ki vishesh sambhanaye hai
[01/05, 12:04] Mrs Badal: भारतीय ज्ञान परंपरा और लोक समाज में जैव विविधता संरक्षण की अवधारणा,

 खान-पान संबंधी ऋतुओं और बदलते मौसम के अनुकूल लोकोक्तियां, कहावतों का मानवीय स्वास्थ्य से संबंध और वैज्ञानिकता
[01/05, 12:04] Mrs Badal: इन विषयों का भी हमें समावेश करना चाहिए
[01/05, 12:24] डंड उज्जैन: बहुत सुन्दर, ज्ञान परम्परा सामाजिक प्रथा ,मुहावरों, लोकोक्तियों, लोककथाओं, लोकगीतों, साहित्य में समाहित है। इनमें व्याप्त विज्ञान को समझना चाहिए। पुरातन पंथी कहना या आधुनिकता के नाम पर तिरस्कार करना और उपहास करना छोड़ना होगा।
[01/05, 12:24] Umesh Singh: पंच परिवर्तन भारतीय ज्ञान परम्परा का व्यवहारिक पक्ष है। सैद्धांतिक पक्ष को व्यवहार में उतारने के लिए कैसे इन्हें पाठ्यक्रमों में जोड़ा जाये, यह विचार करना है।
[02/05, 07:06] Madhusudan Chaube Badwani: मैंने इस भारत बोध विषय की चर्चा नहीं की है। यह प्रथम वर्ष के इतिहास मेजर विषय के प्रथम प्रश्न पत्र का पाठ्यक्रम है। इसका अध्ययन केवल वही विद्यार्थी करते हैं, जिन्होंने इतिहास को मेजर विषय के रूप में चुना है। एक और भारत बोध प्रश्नपत्र है। यह मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम के अंतर्गत है तथा इसका अध्ययन सभी संकायों के प्रथम वर्ष के सभी विद्यार्थियों के लिए किया जाना अनिवार्य है।
[02/05, 07:07] Madhusudan Chaube Badwani: पंच परिवर्तन को ऐसे किसी प्रश्नपत्र में शामिल किया जाना चाहिए, जो सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य हो।
[02/05, 07:14] Madhusudan Chaube Badwani: राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नए पाठ्यक्रम की गतिविधियों को सम्माननीय शिक्षकों के द्वारा गंभीरता से क्रियान्वित किए जाने पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किया जा सकते हैं। 
उदाहरण के तौर पर फर्स्ट ईयर में मेजर विषय इतिहास के सेकंड पेपर में कक्षा संगोष्ठी नामक एक गतिविधि है।
इस गतिविधि के अंतर्गत कल 1 मई को भगवान बुद्ध के जीवनवृत्त और उनके योगदान विषय पर कक्षा संगोष्ठी का आयोजन बड़वानी में किया गया।
कल अवकाश के बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित हुए। 
इस संगोष्ठी के लिए भगवान बुद्ध से संबंधित 21 टॉपिक निर्धारित किए गए।
विद्यार्थियों ने आलेख तैयार किए। विद्यार्थियों ने ही प्रेजेंटेशन किए। यहां तक कि इसका समन्वय और संचालन भी विद्यार्थियों के द्वारा ही किया गया।
[02/05, 08:58] Umesh Singh: आदरणीय डॉ साहब नमस्कार।
आपकी शोध टोली और आपके गंभीर चिंतन को देखते हुए अनुरोध है कि अभी तक जो सुझाव, समस्या और समाधान की विषय वस्तु प्राप्त हुई है उसे एक जायी कर मेरे व्यक्तिगत ह्वाट्सएप पर भिजवा दें।
प्रचलित पाठ्यक्रम में पंच परिवर्तन कहां- कहां कैसे समायोजित हो एक सुन्दर पाठ्यक्रम तीनों वर्ष के ऐसे पाठ्यक्रम में जुड़े जो सभी विद्यार्थियों को पढ़ना हो।
[02/05, 12:50] डॉ अखिलेश शर्मा रूसा: BA First year Political Science ke Indian Constitution ke paper me pathyakram me Nagriko ke Maulik kartavya ka adhyayan karna hai jise panch parivartan ke sath jodkar syllabus mein sammilit kiya ja sakta hai
[02/05, 12:53] Umesh Singh: चौबे जी, कृपया इसे भी जोड़ लें,यह अवश्य स्पष्ट कर दें, नागरिक अधिकार तो संविधान प्रावधान है किन्तु नागरिक कर्तव्य का पालन आत्मानुशासन का व्यवहारिक प्रकटीकरण है।🙏
[02/05, 13:23] Bhart Mishra Chitrakoot: भारत की परिवार व्यवस्था?
[02/05, 13:25] डॉ सीमा रणवीर सूर्यवंशी: सरजी अभी भी है पर्यावरण आधारपाठ्यक्रम में ।
पाठ्यक्रम प्रथम वर्ष में परिवर्तन हुआ हैं आधारपाठ्यक्रम में हिन्दी / अंग्रेजी है। आने वाले वर्ष में पर्यावरण रहता है या नहीं पता चलेगा ।
[02/05, 13:25] डॉ सोनिया सिंह ग्वालियर: भारतीय दृष्टि जीवन को खंडों में नहीं, बल्कि एक समग्र रूप में देखती है—धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का संतुलन। इसी तरह कुछ English texts भी जीवन की जटिलता और संपूर्णता को पकड़ने की कोशिश करते हैं, जैसे Middlemarch, जहाँ व्यक्तिगत, सामाजिक और नैतिक स्तर एक-दूसरे में गुंथे हुए हैं।
[02/05, 13:26] डॉ सोनिया सिंह ग्वालियर: पंच परिवर्तन” भाषा को एक जीवित, विकसित होती हुई सत्ता के रूप में समझने के विकल्प
[02/05, 13:27] डॉ सोनिया सिंह ग्वालियर: समाज और सामूहिकता की दृष्टि से
[02/05, 16:07] Dr Anshul Rai Dental Aiims: स्व का बोध : Selfhood । स्वदेशी । सभी पाठ्यक्रमों में स्कूल कॉलेज में एक चैप्टर । IPR इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर होने से यह जानकारी सभी को हो जाएगी की हम नए innovations करके उनको Patent करा सकते हे और उनका कमर्शियलाइज़ेशन करके एक नया बिज़नेस खड़ा कर सकते हे और हमारे लघु उद्योगों को पुनः इस्थापित कर सकते हे ।भारत सरकार ने भी अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के द्वारा ७५० करोड़ रुपए तक की फंडिंग का प्रबधन रखा हे । जिस से हम स्वदेशी आविष्कार कर सके और अपना import बड़ा सके
[02/05, 16:08] Dr Anshul Rai Dental Aiims: में Dr अंशुल राय AIIMS भोपाल से
[02/05, 16:09] डॉ अखिलेश शर्मा रूसा: *Fundamental Duties in the Indian Constitution*

- *Part*: Part IV-A
- *Article*: Article 51A 
- *Added by*: 42nd Constitutional Amendment Act, 1976

*The 11 Fundamental Duties under Article 51A*  
It shall be the duty of every citizen of India to:

1. *51A(a)*: Abide by the Constitution and respect its ideals, institutions, the National Flag and the National Anthem
2. *51A(b)*: Cherish and follow the noble ideals which inspired the national struggle for freedom
3. *51A(c)*: Uphold and protect the sovereignty, unity and integrity of India
4. *51A(d)*: Defend the country and render national service when called upon
5. *51A(e)*: Promote harmony and spirit of common brotherhood, renounce practices derogatory to dignity of women
6. *51A(f)*: Value and preserve the rich heritage of our composite culture
7. *51A(g)*: Protect and improve the natural environment including forests, lakes, rivers, wildlife
8. *51A(h)*: Develop scientific temper, humanism and spirit of inquiry and reform
9. *51A(i)*: Safeguard public property and abjure violence
10. *51A(j)*: Strive towards excellence in all spheres of individual and collective activity
11. *51A(k)*: Provide opportunities for education to children between 6-14 years. _Added by 86th Amendment, 2002_

*Note*: Part IV-A was not in the original Constitution. It was inserted during Emergency in 1976.
[04/05, 14:26] Umesh Singh: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) केअंतर्गत भारतीय उच्च शिक्षा में इन पांच विषयों को न केवल शामिल किया गया है, बल्कि इन्हें 'समग्र और बहुआयामी शिक्षा' (Holistic and Multidisciplinary Education) का मुख्य आधार बनाया गया है।
यहाँ संक्षेप में बताया गया है कि ये विषय किन-किन रूपों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बने हैं:
1. सामाजिक समरसता (Social Harmony)
NEP के तहत इसे समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञानऔर दर्शन शास्त्र जैसे विषयों में गहराई से जोड़ा गया है।
• किस रूप में:इसे 'मूल्य-आधारित शिक्षा' (Value-based Education) के अंतर्गत रखा गया है।
• कहाँ:यह 'भारतीय ज्ञान परंपरा' (IKS) के अनिवार्य क्रेडिट कोर्स के रूप में पढ़ाया जा रहा है, जिसमें विविधता में एकता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर जोर है।
2. स्वबोध (Self-Awareness / Self-Discovery)
स्वबोध को केवल दर्शन तक सीमित न रखकर इसे आधुनिक मनोविज्ञान और कौशल विकास (Skill Development) से जोड़ा गया है।
• किस रूप में: 'जीवन कौशल' (Life Skills) और 'योग' को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।
• कहाँ:यह फाउंडेशन कोर्सेज और व्यक्तित्व विकास (Personality Development) कार्यक्रमों में 'मानसिक स्वास्थ्य' और'आध्यात्मिकबुद्धि' (SQ) के रूप में शामिल है।
3. पर्यावरण (Environment)
इसे अब केवल एक अध्याय नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जीवन पद्धति के रूप में पेश किया गया है।
• किस रूप में: 'पर्यावरण शिक्षा' (Environmental Education) को सभी संकायों (कला, विज्ञान, वाणिज्य) के लिए अनिवार्य क्रेडिट कोर्स बनाया गया है।
• कहाँ:इसमें जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ' प्राचीन भारतीय पर्यावरण संरक्षण पद्धतियों' को भी पढ़ाया जा रहा है।
4. कुटुम्ब प्रबोधन (Family Values / Family Awakening)
NEP में परिवार को समाज की मूल इकाई मानते हुए इसे सामाजिक विज्ञान के कोर्सेज में विशेष स्थान दिया गया है।
• किस रूप में: 'भारतीय समाज और संस्कृति' (Indian Society and Culture) के अंतर्गत संयुक्त परिवार प्रणाली का महत्व और पारिवारिक नैतिकता को जोड़ा गया है।
• कहाँ:गृहविज्ञान (Home Science), समाजशास्त्र और सामुदायिकसेवा (Community Engagement) के प्रोजेक्ट्स में इसे शामिल किया गया है।
5. नागरिक कर्तव्य (Civic Duties)
अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों पर जोर देना NEP की मुख्य विशेषता है।
• किस रूप में: इसे 'संवैधानिक मूल्यों' (Constitutional Values) के अनिवार्य मॉड्यूल के रूप में पढ़ाया जा रहा है।
• कहाँ: स्नातक स्तर पर 'भारतीय संविधान और मौलिक कर्तव्य' नाम से एक अनिवार्य पेपर (General Elective/Foundation) जोड़ा गया है।
________________________________________
प्रमुख क्रियान्वयन क्षेत्र (Implementation Areas)
इन विषयों को मुख्य रूप से निम्नलिखित माध्यमों से लागू किया जा रहा है:
• IKS (Indian Knowledge Systems): प्राचीन भारतीय दृष्टि से इन पांचों विषयों का एकीकरण।
• VAC (Value Addition Courses): स्नातक प्रथम और द्वितीय वर्ष में अनिवार्य 'क्रेडिटआधारित' पाठ्यक्रम।
• सामुदायिक आउटरीच: छात्रों को गांवों या मोहल्लों में जाकर इन विषयों पर व्यावहारिक कार्य करना होता है।
• बहुविषयक दृष्टिकोण: एक विज्ञान का छात्र भी' सामाजिक समरसता' या' स्वबोध' का विकल्प चुन सकता है।
विशेष: यूजीसी (UGC) ने इन विषयों के लिए 'जीवन कौशल' (Jeevan Kaushal) और 'मूल्यप्रवाह' (Mulya Pravah) जैसे दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो विश्वविद्यालयों द्वारा अपनाए जा रहे हैं।
[04/05, 16:11] Madhusudan Chaube Badwani: अब नहीं है मेम अब हटा दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में फर्स्ट ईयर में लागू किया गया था। इस साल से वहां से हटा दिया गया है। सेकंड ईयर में उद्यमिता विकास और महिला सशक्तीकरण विषय आधार पाठ्यक्रम के अंतर्गत रखे गए हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के पहले पर्यावरण अध्ययन सेकंड ईयर में प्रचलित था। अब इस बात को 5 वर्ष बीत चुके हैं।
[30/04, 19:45] Madhusudan Chaube Badwani: आदरणीय सर जी,
 प्रणाम।
सत्र 2025-26 से मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम भारत बोध प्रारंभ किया गया है।
यह सभी संकायों के स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है।
इस पाठ्यक्रम में कुछ अंशों तक पंच परिवर्तन सम्मिलित हैं।
सादर।
[30/04, 20:09] Umesh Singh: उसके पाठ्यक्रम की अनुक्रमणिका भेज सकें तो अच्छा होगा।वह स्नातक के किस वर्ष से प्रारंभ है
[30/04, 20:12] Dr Anita Narendra Agarwal: ये स्नातक के प्रथम वर्ष से ही प्रारंभ हुआ है 
आपके तो मैं इसका पाठ्यक्रम भेज सकती हूं
[30/04, 20:13] Madhusudan Chaube Badwani: प्रथम वर्ष से आदरणीय। अभी केवल प्रथम वर्ष में ही लागू है। अच्छी बात यह है कि इसे सभी संकाय के विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। बड़वानी अग्रणी कॉलेज में इसके अध्यापन का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है। मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम इसी वर्ष से प्रथम वर्ष में प्रारंभ हुआ है। द्वितीय वर्ष के मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम की प्रतीक्षा है। वह अभी बना नहीं है। उसमें पंच परिवर्तन को विस्तार से शामिल करके प्रत्येक युवा तक पहुंचाया जा सकता है।
[30/04, 20:54] Madhusudan Chaube Badwani: आदरणीय सर जी, यह कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम व्यक्तित्व विकास है. इसके प्रेक्टिकल्स में एक बहुत ही अच्छा प्रेक्टिकल शामिल है. इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को अपने परिवार का वंशावली वृक्ष बनाना है तथा पारिवारिक परम्पराओं पर प्रतिवेदन लिखना है. इसके अध्यापन का अवसर भी मुझे मिला है. तीन सौ से अधिक विद्यार्थियों ने वंशावली वृक्ष बनाते हुए अपनी पांच पीढ़ियों का इतिहास लिखा है. कुटुंब के प्रति जुड़ाव में वृद्धि करने में सहायक है. इसी तरह से वृद्धाश्रम और अनाथालयों का अध्ययन भी इसमें शामिल है. कृपया देखिएगा. इसका भी द्वितीय वर्ष का सिलेबस अब बनेगा. इसमें भी पञ्च परिवर्तन और व्यक्तित्व विकास को सह-सम्बन्धित करते हुए लिखित एवं प्रायोगिक परीक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है.

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