Monday, 5 January 2026

मैं कौन हूं

छिति जल पावक गगन समीरा।
पंच रचित अति अधम सरीरा।।(४/११/-४)

बड़े भाग मानुष तन पावा।
सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा।।(७/४३-७)

कबहुंक करि करुना नर देही।
देत ईस बिनु हेतु सनेही।।(७/४४-६)


ईस्वर अंस जीव अविनासी।
चेतन अमल सहज सुखरासी।।(७/११७-२)

ममैवाशो जीवलोके जीवभूत: सनातन:।
मन: षष्ठानीनिन्द्रयाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति।।(गीत १५/७)

ईश्वर: सर्वभूतानां ह्रृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।(गीता१८/६१)

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