मंडल -कमंडल। राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह!
अब यूजीसी+ कमंडल!!
दरअसल यह एक दिन की भड़ास नहीं है। सरकार का पलड़ा सामाजिक न्याय के साथ जाति के बजन और वोट के जतन में बराबर एक तरफ झुकता आ रहा है।
जातियां सरकार बनाती हैं तो उपकृत होना स्वाभाविक है।
किंतु इस बार कुछ तो चूक हुई। एसी-एस टी के नाम पर अभी भी हिन्दू एस सी,एस टी की तुलना में धर्मांतरित ईसाई ज्यादा लाभ ले रहे हैं। एस सी एस टी यह ढुलमुल नीति देख अपना धर्म बदलकर ईसाई बन रहे हैं।
नियम अपनी जगह है। किस पर लागू होगा स्पष्ट है। किंतु व्यवहार में हिन्दू मतांतरित हो रहा है।
दूसरी यह व्याधि ओबीसी को जोड़ कर आ गई है। इसमें अब सभी मत पंथ के ओबीसी आयेंगे। हमारी बात आप समझ रहे हैं ।
यह एम बाय समीकरण को पुष्ट करेगा। लाभ किसको कितना मिलेगा पता नहीं। शिकायतों का क्या होगा?समय बतायेगा।
किंतु हिन्दू जिस तरह सवर्ण -अवर्ण के नाम पर, अगड़ा, पिछड़ा के नाम पर, अनारक्षित -आरक्षित के नाम पर बंटेगा, सनातन को ही हानि पहुंचायेगा।
सरकारें बन बिगड़ सकती हैं, किंतु जातीय लाभ-हानि भविष्य तो छोड़िए वर्तमान में भी घातक है।
इस पर सरकार 'भय गति सांप छछूंदर केरी।' की स्थिति में आ गई है।
पता नहीं सरकार के सलाहकार कौन हैं? शिक्षा के क्षेत्र में कितने राष्ट्रीय विचारों को लेकर संगठन कार्य कर रहे हैं, क्या उनको विश्वास में नहीं लिया गया। विद्यार्थी परिषद की अपील तो यही बता रही है।
रा शिक्षा निति - 2020 बनी थी तब कहा गया था इतने - इतने लोगों से पूछा गया था।अब क्यों राय नहीं ली गई?
कितने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, छात्रों से राय ली गई? कुलपतियों को भूल जाइये। वे तुलसी बाबा के अनुसार - प्रिय बोलने में विश्वास रखते हैं? क्या शैक्षणिक संगठनों के अध्यक्ष -महामंत्री भी प्रिय बोलने बाले -
सचिव,बैद, गुरु बन गये हैं?
हो सके तो आरक्षण का लाभ ले रहे या उसकी परिधि में आ रहे संगठन प्रमुख,नेता, अभिनेता, ब्यूरोक्रेट्स अवश्य विचार करें।
देश सुरक्षित है तो हम सब सुरक्षित हैं, अन्यथा उदाहरण आंखों के सामने हैं।
अति उत्साह गाय बनाते -बनाते गधा न बना दे।
27/01/26
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