अनसुनी पीड़ा
नेशनल टास्क फोर्स का सर्वे...9% छात्रों को आत्महत्या के विचार आए, 15% को गंभीर तनाव।
हर तीसरा विद्यार्थी परिसर में खुद को मानता है बाहरी।
नीट जैसी काठिन परीक्षाएं पास करके प्रतिष्ठित संस्थानों में पहुंचने वाले
विद्यार्थियों की सीट तो मिल जाती है,
और
(आत्महत्या के मामने महाराष्ट्र में सर्वाधिक 1,764 उप्र में 1,060, दिल्ली 305, हरियाणा में 297, पंजाब में 150, हिमाचल 74. उत्तराखंड ,जम्मू-कामीर में 60-601)
पिछड़ने और कमजोर होने का भय भारी
(2025 के हवाले से रिपोर्ट कहती है. हासिये पर
बसे है,ह टाकर उससे करने है। बाई विधा पर बात तक नहीं करते लगता है कि इससे वे सबके सामने कमजोर साबित हो जाएंगे।
प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिल आगे बढ़ने का रास्ता तो खोलता है, लेकिन परिसर में भेद-भाव उन्हें पढ़ाई छोड़ने की और भी धकेलता है।
खुदकुशी के 31.7% मामलों में पारिवारिक कारण।
देश में होने वाली कुल आत्महत्याओं में 40% लोग 30 साल से कम उम्र के हैं।
वर्ष 2022
1.71
भेदभाव उन्हें भीतर से अकेला कर देते हैं। रिपोर्ट बताती है कि संस्था
सुप्रीम कोर्ट की गठित नेशन फोर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विक यही अकेलापन तनाव और पढ़ाई बीच में छोड़ने की बड़ी वजह बन रहा है। फोर्स के 2.43 लाख विद्यार्थियों पर किए सर्वे में 15% ने माना कि बीते माह में गंभीर तनाव महसूस किया। 15% ने माना कि एक साल में उन्हें बार-बार आत्महत्या के विचार आए। तनाव के चलते 2018 से 2023 के बीच 13,600 विद्यार्थियों ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।
पढ़ाई छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा केंद्रीय विवि के।2018 से 2023 के बी 9,642, आई के 3,542
31.7 फीसदी मामलों में और परीक्षा में अल के चागते महज 1.2%।
कक्षा नौवीं से ही दबाव कम अंक से बढ़ने लगता है तनाव।
अकल पड़े: मदद नहीं मिली तो नशे का सहारा रैगिंग भी झेलते हैं।
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