समस्या
डबल बेड कल्चर!
माता पिता की ता उम्र जवान बने रहने की इच्छा!
धन और ऐश्वर्य की लालसा!
समाज में आदर्श का गिरता प्रतिशत!
करनी कथनी में अंतर!
प्रवचनकर्ताओं की धन और काम की तीव्र लालसा!
इकलौती संतान!
अनियंत्रित अधर्माधारित धन का गृहप्रवेश!
समाधान -
माता पिता का कठोर संयमित आचरण।
दिखावा, झूठ, प्रपंच से दूरी।
विवाह व्यवस्था पर व्यवसाय को प्राथमिकता नहीं दी जाये।
घर में पठन-पाठन , स्वाध्याय का वातावरण।
फिर भी अंतिम इच्छा प्रभु की।
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विचार -
सामाजिक सरोकारों में अध्यात्मिकता की प्राणवायु ही व्यक्ति से लेकर समष्टि तक के आत्मानुशासन और आत्मसंयम की कुंजी है।
करणीय - व्यक्तिगत।
पंच परिवर्तन - (व्यक्ति से समाज तक)
(१) शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विकास।
(२)*सत्य-अहिंसा,**अस्तेय- अपरिग्रह, ***शौच -तप,**** स्वाध्याय -ईश्वर प्राणिधान, *****अभ्यास - वैराग्य।
(३) कुटुम्ब बोध, स्वबोध, नागरिकता बोध, राष्ट्र बोध, वैश्विक दृष्टि बोध।
7389814071
विचारणीय।
ReplyDeleteआपने भूत काल के मध्यम वर्गीय दृष्टि कोण के आधार पर समस्याएं और समाधान चिह्नित किए हैं.... आजकल ये बातें, धार्मिक प्रवचन में कही और अनसुनी रह जाती हैं। सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि कोई भी यह नहीं जानता कि "कमाने खाने, आने जाने"के लिए क्या करें? संसाधन सीमित और इच्छाएं असीमित हैं।
ReplyDeleteसब लोग, अनिर्णय के बंदी हो गये हैं। तथापि, अनेक लोगों को मद्यपान में समाधान दिखाई दे रहा है। नौकरी/व्यवसाय सीमित हैं और, पढ़े-लिखे अयोग्य लोगों की संख्या बढ़ रही है। क्या करें !? एक मात्र समाधान, "प्रेम" है...."दिन शुरू करो तुम प्यार से ; दिन को भर दो तुम प्यार से ; दिन को जी लो तुम प्यार से ; दिन पूरा करो तुम प्यार से ; यही ईश्वरीय मार्ग है... प्यार प्यार प्यार.........