गुवाहाटी | 17 मार्च, 2026
विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान और गुवाहाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका मुख्य विषय "स्वदेशी ज्ञान परंपरा एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विषयवस्तु विकास" रहा।
प्रमुख बिंदु और चर्चा के विषय
कार्यशाला के दौरान शिक्षा जगत के दिग्गजों ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली में भारतीय मूल्यों को पिरोने पर बल दिया:
सर्वांगीण विकास: मुख्य वक्ता श्री के. एन. रघुनंदन (संगठन मंत्री, विद्या भारती) ने कहा कि नई नीति का आधार भारतीय ज्ञान परंपरा है, जो तकनीक के साथ मिलकर छात्रों का पूर्ण विकास सुनिश्चित करेगी।
अंतराल विश्लेषण (Gap Analysis): डॉ. देवव्रत दास ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली और भविष्य की आवश्यकताओं के बीच के अंतर को पाटने पर तकनीकी सत्र लिया।
उद्योग-शिक्षा सहयोग: प्रो. आलोक बुढ़ागोहाईं ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थानों के बीच तालमेल को अनिवार्य बताया।
परिणाम आधारित शिक्षा: डॉ. दिव्यज्योति महंत ने 'आउटकम बेस्ड एजुकेशन' के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने पर मार्गदर्शन दिया।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस वैचारिक मंथन में पूर्वोत्तर भारत के कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने भाग लिया:
प्रो. ननी गोपाल महंता: कुलपति, गुवाहाटी विश्वविद्यालय (मुख्य अतिथि)
प्रो. नलिनी प्रभा त्रिपाठी: निदेशक, IIM शिलांग
श्री पी.वी.एस.एल.एन. मूर्ति: निदेशक, NEDFi
डॉ. पवन तिवारी: संगठन मंत्री, विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र
प्रो. परिमल भट्टाचार्य: अध्यक्ष, विद्वत परिषद (कार्यक्रम अध्यक्ष)
निष्कर्ष और आगामी योजना
कार्यशाला का समापन भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा और प्रतिभागियों के सुझावों के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. ईशांकुर सैकिया के स्वागत भाषण और दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर शिशु शिक्षा समिति असम के पदाधिकारियों सहित अनेक विश्वविद्यालयों के आचार्य और छात्र उपस्थित रहे।
सार: यह कार्यशाला इस बात की पुष्टि करती है कि शिक्षा को केवल "साक्षरता" तक सीमित न रखकर उसे व्यवहारिक, संस्कारयुक्त और आधुनिक बनाने के लिए स्वदेशी जड़ों की ओर लौटना और भविष्य की तकनीक को अपनाना अनिवार्य है।
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