सामाजिक समरसता- करना क्या है,सब जाति वर्ग के सब पंथ प्रांत के सब भाषा भाषी इसमें हमारे मित्र और हमारे कुटुम्ब के मित्र होने चाहिए। मंदिर पानी, श्मशान सब हिंदुओं का एक हो। यह देखना है। अपने कुटुम्ब में कुटुम्ब प्रबोधन का मंगल संबाद।
ऐसा हमारे घर में अपनी माता बहने, पत्नी भाभियां सबसे लेकर, बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सब करेंगे। ऐसा एक घर अपना खड़ा हो गया तो पड़ोसी उसका अनुकरण करेंगे।उनको भी हम बुला कर दिखायेंगे। कुटुम्ब का यह वातावरण आज सब को चाहिए।हम करेंगे 2026 की विजयादशमी के बाद समाज ले जायेंगे।
दूसरा -पर्यावरण, पानी बचाओ,पेंड़ लगाओ, प्लास्टिक हटाओ।
* ऐसे ही स्वदेशी का आचरण घर के अंदर भाषा, भूषा, भजन,भवन,भ्रमण भोजन अपना चाहिए।वह परकीय नहीं चाहिए। हमारे घर के अंदर हम क्यों अंग्रेजी बोलेंगे? हमारी मातृभाषा बोलेंगे।
* और नागरिक नियमों का पालन करना।
ये पांच पंच परिवर्तन के नाते अपने जीवन में लाना और अपने जीवन में सौ प्रतिशत तो एकदम आने वाली नहीं है लेकिन हमारा प्रयास शुरू है और एक एक कदम आगे डाल रहे हैं। और यह जब हो जाये तो समाज को बताना कि ये करो।
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1925की विजयादशमी से 2026की विजयादशमी तक हम इस उपलक्ष्य में कुछ योजनाएं लेकर काम करने वाले हैं।सौ साल से चला हुआ अपना कार्य है। इसलिए दीर्घ अनुभव के आधार पर उसकी एक निश्चित कार्य पद्धति हो गई।जो पुराने लोग हैं,उस कार्य पद्धति में प्रशिक्षित हुए हैं।
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