पांच तत्व छिति,जल,पावक,गगन,समीरा।
पंच परिवर्तन एक आह्वान है।
समाज की व्यापकता - समाज की प्रथम इकाई मनुष्य/व्यक्ति। व्यक्ति का परिवार। व्यक्ति का कुटुम्ब। परिवार हम दो हमारे दो।हम दो हमारे चार। हम एक हमारी चार और उनके ग्यारह ग्यारह (मुस्लिम समाज)। हम दो हमारे दो+ हम एक हमारे अनेक (कन्वर्टेड) समाज। हम दो हमारे एक,हम दो हमारे शून्य (हिंदू समाज)।
क्या भारत में संतान नियंत्रण का कोई सूत्र था? 'दूधो नहाओ,पूतो फलो'।
चार पुत्र -एक वंश चलायेगा। एक सेना में सीमा रक्षक होगा। तीसरा संन्यास धारण कर काल की परिभाषा को विस्तार देगा। चौथा - समाज सेवक होगा।
यह दृष्टि क्या चारों को चारों के चारों पुरुषार्थ के अनुकूल है?
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